माँ दुर्गा की कृपा से कष्ट निवारण

2 weeks ago
।। जय माता दी ।। ।। सप्त श्लोकी दुर्गा ।। अगर घर में संकट, भय और नकारात्मकता बढ़ रही है तो आज से यह 7 श्लोक जरूर पढ़ें। नवरात्रि ही नहीं, रोज पढ़िए यह सप्त श्लोकी दुर्गा और देखिए चमत्कार। हर दिन अगर यह पाठ किया जाए तो घर में सुख, शांति और सुरक्षा बढ़ती है। सप्त श्लोकी दुर्गा माँ दुर्गा की अत्यंत शक्तिशाली स्तुति है। यह सात श्लोकों का संक्षिप्त स्तोत्र है जो दुर्गा सप्तशती (देवी महात्म्य) से लिया गया है और इसे माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावी साधन माना जाता है। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से भय, रोग, संकट और दरिद्रता दूर होती है तथा जीवन में साहस, सुख और सफलता प्राप्त होती है। 1. सप्त श्लोकी दुर्गा (संस्कृत मंत्र और हिंदी अर्थ) श्लोक 1 ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥ अर्थ: माँ भगवती इतनी महान माया हैं कि वे बड़े-बड़े ज्ञानी पुरुषों के मन को भी अपनी माया से मोहित कर सकती हैं। अर्थात समस्त जगत उनकी शक्ति से संचालित है। श्लोक 2 दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥ अर्थ: हे माँ दुर्गा, आपका स्मरण करने से प्राणियों के सभी भय दूर हो जाते हैं। आपका ध्यान करने से बुद्धि और शुभ फल प्राप्त होते हैं। दरिद्रता, दुःख और भय को दूर करने वाली आप जैसी दयालु देवी और कौन है। श्लोक 3 सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥ अर्थ: हे माँ नारायणी, आप सभी मंगलों में श्रेष्ठ मंगल देने वाली, कल्याण करने वाली और सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली हैं। आप शरण देने वाली गौरी हैं, आपको बार-बार नमस्कार है। श्लोक 4 शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ अर्थ: हे देवी, जो शरण में आए हुए दुखी और पीड़ित लोगों की रक्षा करती हैं और सभी के दुखों को दूर करती हैं, ऐसी नारायणी देवी को मेरा नमस्कार है। श्लोक 5 सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥ अर्थ: हे देवी दुर्गा, आप सम्पूर्ण जगत की स्वामिनी और सभी शक्तियों से युक्त हैं। हमें सभी प्रकार के भय से बचाइए। आपको नमस्कार है। श्लोक 6 रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान्सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥ अर्थ: हे देवी, प्रसन्न होने पर आप सभी रोगों को नष्ट कर देती हैं और क्रोधित होने पर मनुष्य की इच्छाओं को भी समाप्त कर देती हैं। जो आपकी शरण में आते हैं, वे कभी संकट में नहीं पड़ते। श्लोक 7 सर्वबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरि विनाशनम्॥ अर्थ: हे तीनों लोकों की अधिष्ठात्री देवी, आप सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करने वाली हैं। हमारे शत्रुओं और कष्टों का भी इसी प्रकार नाश कीजिए। ।। धार्मिक महत्व ।। सप्त श्लोकी दुर्गा का पाठ विशेष रूप से शक्तिशाली माना गया है क्योंकि यह दुर्गा सप्तशती का सार है। ।। मुख्य महत्व ।। भय और संकट से रक्षा रोग और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा धन और सुख की प्राप्ति आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि देवी दुर्गा की कृपा और संरक्षण नवरात्रि, दुर्गा पूजा और दैनिक साधना में इसका पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। ।। पाठ करने की विधि ।। सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर के मंदिर में माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं। लाल पुष्प, अक्षत और कुमकुम अर्पित करें। पहले गणेश वंदना दुर्गा मंत्र उसके बाद सप्त श्लोकी दुर्गा का पाठ करें। अंत में माँ दुर्गा की आरती करें और प्रार्थना करें। पाठ का विशेष समय सबसे शुभ समय सुबह ब्रह्म मुहूर्त या संध्या समय विशेष रूप से: नवरात्रि अष्टमी चतुर्दशी मंगलवार और शुक्रवार ।। पाठ से मिलने वाले लाभ ।। जीवन की बाधाएं दूर होती हैं मानसिक शांति मिलती है घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है देवी की कृपा से कार्य सिद्धि होती है जय माता दी।